मृतक देवाशीष परमार का फ़ाइल फोटो

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हस्तक्षेप से आ पाया दक्षिण अफ्रीका से देवाशीष का शव,परिजनों नेसिंधिया से लगाई थी मदद की गुहार
अंकुर श्रीवास्तव
द क्लिफ़ न्यूज़ गुना
राजस्थान के धौलपुर के रहने वाला 24 वर्षीय युवक साउथ अफ्रीका में काम करने गया। वहां उसकी मौत हो गयी। परिवार वालों की उसके अंतिम बार देखने की इच्छा थी, लेकिन वहां से शव को भारत लाने में 28 लाख रुपये का खर्चा आ रहा था। यह मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पास पहुंचा, तो उन्होंने न सिर्फ युवक के शव को भारत लाने की व्यवस्था कराई, बल्कि उसे यहां लाने में होने वाला खर्च भी अपने स्तर से माफ कराया।

राजस्थान के धौलपुर जिले के सहलपुरा में रहने वाला देवाशीष परमार(24) पुत्र देवेंद्र सिंह परमार साउथ अफ्रीका में कृषि सलाहकार के रूप में काम करने की लिए वर्ष 2018 में गया था। उसके साथ उसके जिले के ही 2-3 और युवा थे।उन्होंने मिलकर साउथ अफ्रीका के कैप्टाउन में काम करना शुरू किया। कुछ दिन पुर्तगाल में भी काम किया। 28 जुलाई को युवक की मौत हो गयी।

परिवार में उसके माता-पिता और एक बहन है। वह इकलौता बेटा था। अपने बेटे और भाई को आखिरी बार देखने की इच्छा परिवार के मन में थी। लेकिन शव को साउथ अफ्रीका से भारत लाने में 28 लाख रुपये का खर्चा आ रहा था। वहीं दूसरी समस्या यह थी कि कोरोना के कारण ज्यादा फ्लाइट भी नहीं चल रही हैं। युवक का परिवार निम्न माध्यम वर्ग का है, इसलिए इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए संभव नहीं था।

ऐसे में युवक के मामा जितेंद्र तोमर जो गुना में रहते हैं, उन्होंने सिंधिया के करीबी योगेंद्र लुम्बा से संपर्क किया। लुम्बा ने सिंधिया से बात कर युवक के शव को भारत लाने का निवेदन किया। सिंधिया ने आने स्तर पर प्रयास किये। अपने स्टाफ को लगातार कॉर्डिनेट करने और व्यवस्थाएं करने के लिए कहा। उनका स्टाफ नियमित तौर पर गुना के लोगों से संपर्क में रहा। सिंधिया ने प्रयास कर शव को भारत लाने में लगने वाला खर्चा माफ कर दिया। बीच मे एक बार यह भी आया कि 2.50 लाख रुपये तो परिवार को देने ही पड़ेंगे, लेकिन वे व्यवस्था करने में सक्षम नहीं थे। सिंधिया ने यह पैसा भी माफ कराया।

बुधवार को युवक का शव प्लेन से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। युवक के परिवार वाले पहले ही कहाँ पहुंच गए थे। वहां से एम्बुलेंस के माध्यम से शव को धौलपुर लाकर उसका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार वालों का कहना है कि उनकी बस यहीं इच्छा थी कि एक आखरी बार बेटे का चेहरा देख लें। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की वजह से ही यह मुमकिन हो पाया। उन्होंने हरसंभव मदद की और उनके कारण ही बेटे का चेहरा देखना नसीब हो पाया।

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